जहाँ भक्ति प्रकृति बनती है,
और सेवा ही साक्षात आराधना है।
मंदिर के गर्भगृह में हम पवनपुत्र हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाते हैं; देहरी से बाहर निकलते ही प्लास्टिक और गन्दगी से धरती का दम घोंट देते हैं।
हनुमान जी पवनपुत्र हैं—जब हम हवा को विषैला करते हैं, तो हम उन्हीं की श्वास पर प्रहार करते हैं। लक्ष्मण के प्राण बचाने हेतु संजीवनी पर्वत उठाने वाले महाबली आज अपने कर-कमलों में "अमर खेजड़ी वृक्ष" उठाकर कलियुग के गन्दगी-राक्षस के संहार का आह्वान कर रहे हैं।
“सर सांटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण।”(यदि सिर कटने के बदले एक वृक्ष भी बचता है, तो यह सौदा बहुत सस्ता है।)
— अमृता देवी विश्नोई एवं ३६३ अमर खेजड़ली बलिदानी (१७३० ई.)
आंदोलन के संकल्पित लक्ष्य — प्रथम प्रमाणित अभियानों के साथ वास्तविक (लाइव) आँकड़े यहाँ जुड़ेंगे।
बालाजी महाराज के नाम पर एक वृक्ष अपनाएं आज के युग की सबसे बड़ी सेवा
त्रेतायुग में जब लक्ष्मण मूर्छित हुए, तो पवनपुत्र हनुमान जी संजीवनी पर्वत लेकर आए थे। आज जब हमारी धरती दूषित वायु, प्रचंड ताप और बंजर माटी से छटपटा रही है, तो जीवित देशी वृक्ष ही साक्षात संजीवनी है। बालाजी महाराज के नाम पर एक खेजड़ी, नीम या पीपल वृक्ष अपनाएं—जो आने वाली पीढ़ियों को ३०० से अधिक वर्षों तक शुद्ध वायु, शीतल छाया और जीवन देगा।
जियो-टैग्ड व आपके नाम की पट्टिका
सटीक GPS लोकेशन सहित पौधा रोपण, जिसे आप गूगल मैप पर कभी भी देख सकते हैं, आपके नाम की समर्पण पट्टिका सहित।
३ वर्ष तक पूर्ण संरक्षण व देखरेख
स्थानीय विश्नोई सेवादार व स्वयंसेवक पौधे की जड़ें पाताल जल तक पहुँचने तक नियमित जल व खाद की सेवा करते हैं।
मंगल आरती में अभिमंत्रित प्रमाण-पत्र
मंदिर प्रांगण में पवनपुत्र के चरणों में संकल्पित डिजिटल संजीवनी पत्र सीधे आपके व्हाट्सएप पर भेजा जाएगा।
१००% प्लास्टिक-मुक्त जैविक बाड़
बिना किसी प्लास्टिक जाली या थर्माकोल के, केवल प्राकृतिक काँटों, पत्थरों व बाँस से निर्मित सुरक्षा घेरा।
पवनपुत्र सेवा एवं पावन आरती समय-सारणी
यहाँ प्रत्येक प्रहर की पूजा प्रकृति-संरक्षण और पंचभूत शुद्धि से जुड़ी है। घर बैठे लाइव जुड़ें और अपना सेवा संकल्प अर्पित करें।
ब्रह्म मुहूर्त जागरण एवं मंगल आरती
शुद्ध वायु शुद्धि, सूर्योदय पूर्व प्राणायम एवं पवनपुत्र का प्रथम पावन दर्शन।
खेजड़ली वन परिक्रमा एवं पक्षी परिंडा सेवा
३६३ खेजड़ली बलिदानियों की स्मृति, परिंडों में शीतल जल एवं मूक पक्षियों को चुग्गा अर्पण।
श्रृंगार आरती एवं पावन बाल-भोग
सिंदूर लेपन, तुलसी माला अर्पण एवं प्लास्टिक त्यागने का सामूहिक पावन संकल्प।
मध्याह्न राजभोग एवं गौ-ग्रास आरती
सात्विक गुड़, चना व सांगरी नैवेद्य। प्रथम भोग गोमाता एवं मरुस्थलीय जीवों को।
संध्या पादप सींचन एवं स्वच्छता अभियान
मंदिर वाटिका व वनों में पौधों को जल अर्पण तथा गन्दगी स्थलों का जियो-टैगिंग।
महा-संध्या आरती एवं १०८ दीपदान
१०८ मिट्टी के दीयों से महा-आरती। देश भर से हजारों भक्तों का लाइव संकीर्तन।
सुंदरकांड एवं पर्यावरण युवा संवाद
रामायण व वेदों में प्रकृति संरक्षण पर आधारित युवाओं का संवाद व प्रश्नोत्तरी।
शयन आरती एवं मौन प्रार्थना
दिन भर की सेवा का समर्पण, आने वाली पीढ़ी के लिए स्वच्छ वायु की मौन प्रार्थना।
खेजड़ी के बालाजी: ८ पावन सूत्र
यह केवल नियम नहीं, अपितु हनुमान जी के हर युवा सेवक का धर्म-प्रतिज्ञा पत्र है।
देवालय से पर्यावरण तक (गन्दगी अधर्म है)
धरती पर कचरा और प्लास्टिक फेंकना केवल नागरिक अपराध नहीं, अपितु अधर्म और पवनपुत्र का प्रत्यक्ष अपमान है। परिवेश की शुद्धि ही बालाजी की सच्ची पूजा है।
खेजड़ी का अमृत्व (एक व्यक्ति, एक देशी वृक्ष)
1730 की खेजड़ली शहादत की स्मृति में प्रत्येक भक्त वर्ष में कम से कम एक देशी वृक्ष (खेजड़ी, नीम, पीपल) रोपेगा और उसकी संतानवत रक्षा करेगा।
प्लास्टिक मुक्त प्रसादम (सात्विक पवित्रता)
किसी भी मंदिर परिसर, भंडारे या सेवा कार्य में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक व थर्माकोल वर्जित होगा। प्रसाद केवल दोना-पत्तल और कुल्हड़ में दिया जाएगा।
संकटमोचन स्वच्छता सेना (कर्मयोगी भक्त)
प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को कम से कम १ घंटा सार्वजनिक स्थानों, तालाबों, श्मशानों और मन्दिर मार्गों की गन्दगी को अपने हाथों से साफ करने का संकल्प।
पंचभूत शुद्धि (जल, वायु और माटी का रक्षण)
क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा—इन पाँचों तत्वों का रक्षण। नदियों, बावड़ियों और जोहड़ों में कचरा या रासायनिक विसर्जन महापाप है।
मूक जीव-जन्तु सेवा (करुणा का धर्म)
आवारा पशुओं, पक्षियों और वनों के जीवों के लिए जल-पात्र (परिंडे), गौ-ग्रास और चारे की निरंतर व्यवस्था करना अनिवार्य धर्म है।
अहंकार और व्यवसाय से मुक्ति (समानता का मन्दिर)
कोई वीआईपी दर्शन नहीं, कोई टिकट या शुल्क नहीं। जो जितना अधिक श्रम और प्रकृति-सेवा करेगा, वह बालाजी के उतना निकट होगा।
जन-आंदोलन का अखंड विस्तार (राष्ट्रीय क्रांति)
गाँव-गाँव, घर-घर तकनीक, मोबाइल ऐप और स्थानीय बैठकों के माध्यम से भारत के हर युवा को 'पर्यावरण हनुमान सेना' का योद्धा बनाना।
गन्दगी का संहार • सेना के प्रथम लक्ष्य
कोई कॉर्पोरेट प्रचार नहीं — यहाँ केवल प्रमाणित कर्म ही दिखाया जाएगा। ये वे प्रथम पावन स्थल हैं जिन्हें सेवा सेना प्लास्टिक-मुक्त करने की तैयारी कर रही है।
ये चित्र प्रतीकात्मक (स्टॉक) हैं — प्रथम सफाई अभियान पूर्ण होते ही यहाँ वास्तविक जियो-टैग तस्वीरें और प्रमाणित आँकड़े जोड़े जाएँगे।
Images are representative stock photos. Real geo-tagged before/after photos and verified numbers will replace them once our first documented drives are complete.
खेजड़ली धाम तीर्थ मार्ग — प्लास्टिक मुक्ति अभियान (प्रस्तावित)
“हमारा लक्ष्य: तीर्थ मार्ग को प्लास्टिक से मुक्त कर वहाँ देशी खेजड़ी पौधों की हरियाली स्थापित करना।”
प्राचीन बावड़ी व हनुमान मन्दिर घाट पुनरुद्धार (प्रस्तावित)
“हमारा लक्ष्य: सैकड़ों वर्ष पुरानी बावड़ी को मलबे से मुक्त करना और पक्षियों हेतु परिंडे स्थापित करना।”
सभी प्रमुख मंचों पर एक ही पावन नाम
सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ही निर्बाध पहचान: @khejrikebalaji
आधिकारिक विचार, नीति संवाद और प्रेस विज्ञप्ति
कायाकल्प रील्स, अमृता देवी गाथा और युवा प्रेरक वीडियो
वृत्तचित्र, स्वच्छता सेना अभियान और पावन भजन
ग्राम पंचायत, बुजुर्ग एवं पारिवारिक समुदाय संवाद
दैनिक पर्यावरण विचार एवं त्वरित जन-संवाद
r/india, r/Rajasthan पर खुली चर्चा और AMA
खेजड़ी पोस्टर, वैदिक श्लोक एवं सुलेख कलाकृतियां
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